- ### भारत के पहले प्रधानमंत्री: एक दूरदर्शी नेता
पंडित जवाहरलाल नेहरू ने न केवल भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया, बल्कि उन्होंने एक नव-स्वतंत्र राष्ट्र की लोकतांत्रिक पहचान को आकार देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका दृष्टिकोण एक आधुनिक, धर्मनिरपेक्ष और औद्योगिक भारत का था।
### क्रियाशील लोकतंत्र की स्थापना
नेहरू की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक भारत में संसदीय लोकतंत्र की जड़ें जमाना था। उन्होंने निम्नलिखित माध्यमों से इसे संभव बनाया:
– **सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार:** नेहरू ने गरीबी और अशिक्षा के बावजूद सभी नागरिकों को मतदान का अधिकार देने पर जोर दिया, जिससे 1951-52 में भारत का पहला सफल आम चुनाव संपन्न हुआ।
– **संस्थानों का निर्माण:** उन्होंने चुनाव आयोग, स्वतंत्र न्यायपालिका और योजना आयोग जैसे मजबूत संस्थानों की स्थापना की, जो लोकतंत्र के स्तंभ बने।
– **संसदीय परंपराएं:** नेहरू संसद के प्रति अत्यंत सम्मान रखते थे और विपक्षी दलों की आलोचना को भी महत्व देते थे, जिससे स्वस्थ लोकतांत्रिक चर्चा की संस्कृति विकसित हुई।
### आधुनिक भारत का विज़न: ‘आधुनिक भारत के मंदिर’
नेहरू का मानना था कि विज्ञान और तकनीक ही भारत की प्रगति का मार्ग हैं। उनके विज़न के प्रमुख बिंदु इस प्रकार थे:
– **वैज्ञानिक और औद्योगिक विकास:** उन्होंने IIT, AIIMS और परमाणु ऊर्जा आयोग जैसे संस्थानों की स्थापना की। उन्होंने बड़े बांधों और इस्पात संयंत्रों को ‘आधुनिक भारत के मंदिर’ कहा।
– **धर्मनिरपेक्षता:** विविधता वाले देश में एकता बनाए रखने के लिए उन्होंने धर्मनिरपेक्षता को राज्य की नीति का मुख्य आधार बनाया।
– **गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM):** अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर, उन्होंने भारत को शीत युद्ध के दौरान किसी भी सैन्य गुट में शामिल न कर एक स्वतंत्र विदेश नीति का नेतृत्व किया।
### निष्कर्ष
नेहरू का योगदान केवल राजनीति तक सीमित नहीं था; उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Temper) को बढ़ावा दिया और एक ऐसी शिक्षा प्रणाली की नींव रखी जिसने भारत को वैश्विक स्तर पर एक ज्ञान शक्ति के रूप में स्थापित किया। आज का सुदृढ़ भारतीय लोकतंत्र उनकी इसी दूरदर्शिता का परिणाम है।
